Online Astrologer
Dinesh Yogi
4.65   ( 483)

Expertise : Vedic Astrology , kundli Anylysis, Gems consultant, yantra consulting, karamkand puja Vastu

Experience : 28 years

Languages : Hindi

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MON-SUN :: 10:00AM - 10:00PM

I am an astrology specialist and I master the knowledge of vedic astrology, gems, yantra and vastu consultancy. I have experience of more than 28 years in the field of kundli analysis. Over this span of time I have analysed over 10,000 kundlis and with my proper guidance have solved the problems that arose in the lives of people.

My guru who taught me jyotishi is my late father Sri Balkishan Yogi and I have been practicing astrology since 1992. I am jyotish degree holder and have passed the BA jyostish karamkand Sanskrit degree in first division. I also acquired masters degree in Jyotishi from Uttarakhand Open University, that is recognized by the Uttarakhand state government. I have an experience in performing various puja and anushthan, karamkand mantra and also hold a speciality in yantra and sriyantra.

Astrology is my full time profession, I have helped many people by solving their problems using yantra, sriyantra, gems, rudraksh and many modern astrology techniques. I offer my services as a consultant of financial problems, vivah problems, educational and business problems. And I also help and guide for mangal dosh, kalsarp dosh, pitra dosh and also a consultant for graham yog and its nivaran

नाभास योग-  नाभास योग किसे कहते हे ओर  इनके कितने भेद हे ओर इनके कितने   उपभेद हे। ज्योतिष शास्त्र के प्रवर्तक महर्षि पराशर द्वारा लिखित:,  पराशर  होरा शास्त्र नामक् ग्रंथ के नाभासयोगाध्याय् मे  लिखा गया  हे की नाभस् योग के 32 भेद ओर 1800 प्रभेद  हे। उन 32 भेद मे से 3 आश्रय योग ओर 2 दल योग 20 आकृति योग ओर 7 संख्यायोग  कहे गये है।                                                     नाभस योगो के नाम् निम्नवत हे। 32 भेद मे 3 आश्रय योग  रज्जु,मुसल योग,नल योग होते हे । माला ओर सर्प योग दल योग होते है। गदा ,शंकट श्रंगा  विहंगम, हल,वज्र,यव,कमल, वापी, यूप, शर ,शक्ति,दंड,नौका,कूट,चाप, अर्ध चंद्र, चक्र, ओर समुन्द्र योग यह 20 योग आकृति योग कहे गये हे। बल्ल्की,दाम,पाश,केदार, शूल , युग,ओर गोली 7योग्  संख्या योग होते हे।  अब हम इन योगो के लक्षण ओर फल बातएंगे।                                                                        1-रज्जु योग- यदि समस्त ग्रह चर राशि १,४,७,१० मे हो तो रज्जु नामक आश्रया योग होता है । इस योग मे जन्म लेने वाला जातक भ्रमन्  शील ,सुंदर रूप वाला,परदेश  मे जाने से स्वास्थ लाभ करने वाला,  क्रोधी स्वभाव का होता हे।          2-मुसल् योग- यदि समस्त ग्रह  स्थिर (२,५,८,१२) राशि मे हो तो मुसल योग होता हे। इस योग मे जन्म लेने वाला जातक मानी, ज्ञानी,धन आदि से युक्त  राजमान्य, विख्यात, अधिक पुत्रवाला, स्थिर स्वभाव वाला होता हे।                       3-नल् योग- यदि समस्त ग्रह  दिस्वभाव राशियों (३,६,९,१२,) राशि मे हो तो नल नामक योग होता हे। इस योग मे जन्म लेने वाला जातक कम या अधिक देह वाला,धन संग्रह करने वाला, अत्यंत चतुर, बंधुओ का प्यारा  ओर सुंदर रूप वाला होता हे। ये चर आदि राशियों पर निर्भर  होने के कारण आश्रय योग कहलाता हे।               2-दल् योग- दल योग मे माला योग ओर सर्प योग 2 भेद हे।                                                                             4-माला योग- यदि सभी शुभ ग्रह  3 केन्द्रो  हो तो माला योग होता हे।इस योग मे जन्म लेने वाला जातक नित्य सुख भोगने वाला, वाहन ,वस्त्र, अन्ना आदि के भोग  से संपन्न, सुंदर ओर एक से अधिक पत्नी वाला होता है।                  5-सर्प् योग-  यदि समस्त पापग्रह सूर्य मंगल   शनि  ये 3 केन्द्रो मे हो ओर शुभ ग्रह केंद्र  को छोड़कर कही ओर पड़े हो तो सर्प नमक योग होता हे। इस योग मे जन्म लेने वाला जातक विषम प्रकृति वाला, कूर ,धन हींन, नित्य दुखी, दीन, ओर दुसरो से अन्न मांगकर खानेवाला होता है।            आकृति योग- 6 गदा योग-  समीप के 2 केन्द्रो मे सभी ग्रह बैठे हो तो गदा नामक योग होता हे। इस योग मे जन्म लेने वाला  जातक सदा धन्यापर्जन मे रत, यज्ञ कारक , शास्त्र, एवं संगीत मे दक्ष , धन  सोना एवं रत्ना आदि  धातु से युक्त होता हे।                                                                          7- संकट योग- यदि समस्त ग्रह लग्न ओर सातवे घर मे हो तो संकट नामक् योग होता हे। इस योग मे जन्म लेने वाला जातक रोग से पीड़ित, मूर्ख , गाडी से जीविका चलानेवाला , निर्धन, एवं मित्रादी ओर स्वजनों से हीन होता हे                                                                              8-विहङ्म्( पक्षी ) योग- यदि समस्त ग्रह चतुर्थ ओर दशम  भाव मे हो तो विहंगम योग होता हे। इस योग मे जन्म लेने वाला जातक भ्रमन् करने वाला, ओर पर तंत्र दूत, सूरत से प्राप्त  जीविका  वाला  कलह कारक् होता हे।                   9- श्रंग योग- यदि लग्न से  1,5,9 स्थान  मे सभी ग्रह हो तो श्रंगा टक नामक  योग होता हे। इस योग मे जन्म लेने वाला जातक  कलहकारक  युद्ध कारक , सुखी, राजा का   प्यारा, मनोहर पत्नी वाला, धनी स्त्री से  बे र रखने वाला होता हे।                                                                 10-हल् योग- यदि लग्न्  से भिन्न  २,६,१०,अथवा 3,7,11 वा इस तरह  से किसी 3 स्थानों पर सभी ग्रह बैठे हो तो हल नामक योग होता हे। इस योग मे जन्म लेने वाला जातक अधिक भोजन करने वाला, गरीब किसान  दुखी, चिंताकुल, मित्र  एवं बंधुओ से युत ओर नौकर होता हे।         11-वज्र् योग- यदि लग्न ,सप्तम मे सभी शुभ ग्रह हो एवं चतुर्थ दशम मे सभी पाप ग्रह बैठे हो तो  वज्र  नामक योग् होता हे। इस योग मे जन्म लेने वाला जातक बाल्य तथा वृद्ध  अवस्था  मे सुखी,शुर, सुंदर,  भाग्य हीन दुष्ट  एवं दुसरो से वे र भाव रखने वाला होता हे।                          12- यव योग- लग्न मे ओर सप्तम मे सभी पाप ग्रह बैठे हो ओर चतुर्थ ओर दशम मे सभी शुभ ग्रह बैठे हो तो  यव नाम् का योग होता हे। इस योग मे जन्म लेने वाला जातक  व्रत,नियम,एवं अन्य मंगल कार्य करने वाला माध्यवस्था मे सुखी, धन पुत्रो से युक्त दानी तथा  स्थिर  चित्त वाला होता हे।                                                                         13- कमल योग- समस्त ग्रह केंद्र (1,4,7,10) मे  हो तो कमल नामक योग होता हे। इस योग मे जन्म लेने वाला जातक धनी, गुण से युक्त, दीर्घायु  विख्यात   कीर्ति वाला, शुद्ध सैकड़ो शुभ कार्य करने वाला एवं राजी होता हे।         14-वापी योग- यदि सभी ग्रह केंद्र से भिन्न(पंनफर  तथा आपोकिल्म) मे बैठे हो तो वापी योग होता हे। इस योग मे जन्म लेने वाला जातक धन संग्रह  करने मे निपुण स्थिर धन एवं सुखो से युक्त, पुत्रो से युक्त, नाटक -नृत्य आदि को देखने मे सुखी राजा होता हे।                                        15-यूप् योग- लग्न से  क्रम 4 स्थानों मे समस्त ग्रह हो तो यूप योग होता हे। इस योग मे  जातक आत्मा का ज्ञाता , यज्ञ करता स्त्री से युक्त ,व्र्त-नियम् मे रत रहने वाला ओर विशििष्ठ  पुरष होता हे।                                               १६-श् र योग- यदि चतुर्थ से क्रम से  4 स्थनों मे समस्त ग्रह बैठे हो श र योग होता हे। इस योग मे जन्म लेने वाला जातक बान  बनाने वाला, कारागार का स्वामी, शिकार के माध्यम  से धन प्राप्त करने वाला, मास खाने वाला, हिंसक ओर कुकर्म करने वाला होता हे।                                  17- शक्ति योग-सप्तम् से 4 स्थानों क्रमश् सभी ग्रह हो तो शक्ति नामक योग होता है।इस योग मे  उत्पन्न जातक अर्थ हीन एवं  फल हीन  जीवन वाला होता हे। दुखी, नीच आलसी दीर्घायु,युद्ध कारक होता हे स्थिर चित्त वाला एवं सुंदर होता हे।                                                           18- दंड योग- यदि समस्त ग्रह क्रमश  दशम भाव से 4 स्थानों पर  बैठे हो तो दंड नामक योग होता हे।इस योग मे जन्म लेने वाला जातक पुत्र,स्त्री,ओर धन से बंचित , निर्दयी , स्वजनों  के द्वारा त्यागा हुआ। दुखी नीच ओर नौकर होता हे।                                                          19-नोका योग- लग्न से लगातार ७ सात स्थानों मे सभी ग्रह हो तो नौका योग होता हे।इस योग मे जन्म लेने वाला जातक जल से उत्पन्न  (मोती, शंख आदि )  बस्तुओ से जीविका चलाने वाला, धनी, महत्वकाक्षी, विख्यात, कीर्ति वाला, दुष्ट  कंजूस, मलीन, ओर लोभी होता हे।                २०- कुट योग-सब् ग्रह  चतुर्थ स्थान 7 सात स्थानो मे सब ग्रह हो तो कुट नामक  योग होता हे। इस योग मे जन्म लेने वाला जातक मिथ्यावादी , जेल का अ कधिकारी,  गरीब मूर्ख कुर, कुटज, तथा पर्वत या दुर्ग मे रहने वाला होता है।          21-छत्र् योग-सप्तम् स्थान से सात स्थानों मे सभी ग्रह हो तो छत्र योग होता है।इस योग मे जन्म लेने वाला जातक अपने जनो का आश्रित, दयालु,, अनेक राजाओं का मान्य, उत्तम बुद्धि से युक्त प्रथम तथा  अंतिम  अवस्था मे सुखी, दीर्घायु तथा आतपात्री होता हे।                                         22-चाप् योग-दशम् स्थान से सभी सात स्थानों मे सभी ग्रह हो तो चाप योग होता हे। इस योग मे जन्म लेने वाला जातक   मिथ्याबादी ,जेलर ,चोर,धूर्त,जंगलचारी , भाग्य हीन  एवं माध्यवस्था मे सुखी होता हे।                                 23-अर्ध् चंद्र योग- यदि चन्द्रमा सातवे भाव मे हो ओर शेष ग्रह  तीसरे भाव से ११वे भाब तक हो तो अर्ध चंद्र योग होता हे । इस योग मे उत्पन्न मनुष्य  सेनापति, सुंदर  शरीर राजा का पिर्य  बलबान एवं सुवर्ण आदि  भूषणो से युक्त होता हे।                                                                    24-चक्र्  योग-लग्न् से आरम्भ करते एकांतर से 6 स्थानों(१,३,५,७,९,११)स्थानों पर सभी ग्रह हो तो  चर्क् नामक योग होता हे। इस योग मे जन्म लेने वाला जातक सम्पूर्ण राजाओं से वंदित हे चरण जुनके ऐसा चक्रवृती  राजा होता हे।                                                             25- समुन्द्र योग- यदि समस्त ग्रह धन दूसरे बगाव से  एकांतर  स्थानों (2,4,6,810,12)मे सभी ग्रह हो तो  समुन्द्र नामक  योग होता है। इस योग मे जन्म लेने वाला जातक रत्न आदि से परिपूर्ण भोगवान जनो का  प्यारा  पुत्र युक्त, स्थिर संपत्ति वाला ओर सुंदर शील वाला होता है।                                                                          संख्या योग-    सात योग संख्या योग कहलाते हे। गोल,युग,शूल योग,केदार योग,पाश योग दाम् योग  वीण। योग ये सात योग संख्या योग कहलाता हे।                        26-गोल् योग- सभी ग्रह एक राशि मे हो तो गोल योग होता हे। गोल योग उत्पन्न जातक बलबान, धन हीन,  विद्या तथा विज्ञान से हीन, मलिन, सदैव  दुखी एवं  दीन होता हे।        27-युग् योग- सभी ग्रह 2 राशि मे हो तो युग योग होता हे। इस योग मे जन्म लेने वाला जातक पाखंडी, धन हीन, समाज से बहिस्कृत, एवं पुत्र ,माता, पिता तथा  धर्म से हीन  होता हे।                                                           28- शूल योग-सभी ग्रह   3 स्थानों मे हो तो  शूल योग होता हे।इस योग मे जन्म लेने वाला जातक    गर्म स्वाभाव वाला, आलसी , धन हीन हिंसक ,समाज से बहिस्कृत, अत्यंत वीर एवं युद्ध मे यश प्राप्त करने वाला होता हे।      29-केदार् योग- यदि सभी ग्रह 4 राशियों मे मे हो तो  केदार योग होता हे।इस योग मे जन्म लेने वाला जातक उत्पन्न सभी का उपकार करने वाला कृषिकार्य कारक, सत्य बोलने वाला, सुखी , चंचल , स्वभाव वाला ओर धन्यवान हिता हे।                                                        30 पाश योग- सभी ग्रह 5 राशियों मे हो तो पाश नामक् योग होता है। इस योग मे उत्पन्न जातक कारागार का भागी, कार्य मे  निपुण परपंची, अधिक बक्त्ता शील रहिर, अधिक नौकर वाला ओर अधिक परिजन वाला होता हे।     31-दाम् योग-सब् ग्रह 6 राशि मे हो तो दाम योग होता है। इस  योग मे जन्म लेने वाला   जातक दुसरो का कल्याण करने वाला, नीति के द्वारा धनोपर्जन करने वाला, पैसे वाला विख्यात पुत्र रत्न आदि से युक्त, धीर तथा  विद्यमान होता हे।                                                                   32- वीणा योग- यदि सभी ग्रह 7रशियो मे बैठे हो तो वीणा योग होता हे।इस योग मे जन्म लेने वाला व्यक्ति  गाने तथा नाचने वाला एवं बजाने मे प्रेम रखने वाला ओर निपुण, सुखी,धनी, नेता ओर अधिक नौकर वाला होता हे।                                                    

2021-07-11

sahil Rana


sahil Rana


Sir remedy bta do

Jagriti Singh


A positive confident attitude. thanks to him

Jagriti Singh


A positive confident attitude. thanks to her

Dinesh Yogi


Rhythm Khubchandani ji namskar aapne kebl 1 minutes chat ki hai 1 minutes chart tayar karne mai lagta hai tab tak 1minute mai aapne chat end kar diya

Rhythm Khubchandani


aapne mujhe reply nhi kiyaa... mere paise barbad hogaye... bauth ganda aap hai

Dinesh Yogi


sory Arora ji or others jin logo ne mujh se chat kiya or unko unke Answer nahi mil paye kuch network ki problem ki bajah se aap logo ko pareshani hui thanks

Vijay Arora


pta nhi kya tha

Dinesh Yogi


sohni Nandi ji aapne apne friend ki detail nahi di provide me detail and call me talktoastro

Sohini Nandi


Unke sath koi chance h? Reply kar dijiye please

Ishaan Bhatnagar


Very informative and quick responsive. Special on Mangal dosh and marriage remedy.

Shreya Agarwal


very good knowledge. Thanks for clearing doubt.

Dinesh Yogi


thanks

Dinesh Yogi


dear Ritika aapne 2 different date di isliye late hua aapne 1date di 11/05/2001 bad me aapne 28/06/2001 di isaliye late hua

Ritika Gaur


tooooo late

Mayur Gajjar


Explained very well Thanks...

asg s


cannot pinpoint and say anything too general time frame waste of time and money

Abhijeet Arora


Best Astrologer!

Nishant Sharma


His prediction came true , the session also helped me to get what I wanted , it is people like him who are the hero’s, I will recommend you to all Sir

Subankshi paul


sir in free session can u reply my answer please sir i am waiting ur prediction and I am waiting ur answer please sir

Subankshi paul


thank you sir. I am really satisfied ur answer. that's why it's my request sir when you are free today again u reply my all answers. My question no- 558,559,560,561,562 please sir

Saurabh


Lovely speaking to you Dinesh ji!!!Great Guidance.

Ankush Dahia


thank you sir again ... your knowledge and way of talking is v good